Thursday, 8 January 2026

कल सिर्फ एक कल्पना है जो कभी आता नहीं...

 आपने कभी इस पर ध्यान दिया है कि मनुष्य पूरा जीवन जीने की तैयारी में ही लगा रहता है, पर स्वयं जीता कभी नहीं है।। वह हर समय किसी आने वाले कल की प्रतीक्षा करता है।। उसे लगता है कि आज नहीं, कल जीवन शुरू होगा।। अभी तो बस तैयारी चल रही है।।

कोई कहता है जब पैसा हो जाएगा तब जी लूँगा।। कोई कहता है जब घर बन जाएगा तब जी लूँगा।। कोई कहता है जब बच्चे थोड़े बड़े हो जाएँ तब जी लूँगा।। कोई कहता है जब काम-धंधे से निवृत्त हो जाऊँगा, तब शांति से जी लूँगा।। और कोई यह सोचता है कि बस ये दो-तीन जरूरी काम निपटा लूँ, फिर आराम से जीना शुरू करूँगा।।यही सोच पूरी उम्र चलती रहती है।।हर दिन एक वादा करता है कि आज नहीं, कल।। हर सुबह एक आश्वासन देती है कि अभी नहीं, थोड़ा बाद में।। और इस थोड़ा बाद में के चक्कर में जीवन हाथ से निकलता चला जाता है।। मनुष्य थक जाता है, उम्र बीत जाती है, पर जीने की बारी नहीं आती।।सबसे बड़ा धोखा कल है।।

कल कभी आता ही नहीं।। किसी का कल कभी नहीं आया  जिसे आया वह भी आज बनकर ही आया।। कल सिर्फ एक कल्पना है एक टालने का तरीका है।। यह मन को सांत्वना देता है कि अभी नहीं, बाद में परंतु जीवन बाद में नहीं होता क्योंकि जीवन हमेशा अभी होता है।।और इसी बीच एक दिन मृत्यु आ खड़ी होती है।। बिना सूचना, बिना अनुमति और तब सारी तैयारियाँ अधूरी रह जाती हैं।। पैसे की योजना अधूरी,शांति का सपना अधूरा,जीने की इच्छा अधूरी।। आदमी समझता है कि वह बहुत समझदारी से जी रहा था, जबकि सच यह होता है कि उसने जीवन को टालते-टालते खो दिया।।यह कोई डराने की बात नहीं है यह सिर्फ देखने की बात है।।

जीवन कोई मंज़िल नहीं है जिसे पहुँचकर जिया जाए।।जीवन तो रास्ता हैऔर रास्ते में ही जिया जाता है।। जो यह सोचता है कि पहले सब ठीक कर लूँ, फिर जीऊँगा वह कभी नहीं जी पाता।। क्योंकि सब ठीक कभी नहीं होता।। हमेशा कुछ न कुछ बाकी रहता है।।

जीना काम छोड़ देने का नाम नहीं है न ही जीना जिम्मेदारियों से भागने का नाम  है।। जीना यही है कि काम करते हुए भी भीतर आनंद बना रहे।। हाथ काम में हों, पर मन टला हुआ न हो।। भविष्य की चिंता हो पर इसके लिए वर्तमान कुचला न जाए।।जो व्यक्ति यह जान लेता है कि जीवन बाद में नहीं अपितु अभी है वही सच में जीता है।। वह काम भी करता है योजना भी बनाता है  पर जीने को रोकता नहीं।। वह हँसता है महसूस करता है और  साधारण बातों में भी रस ढूँढ लेता है।।
आज ही जीना कोई दर्शन नहीं है, यह व्यावहारिक सच्चाई है क्योंकि आज के अलावा कुछ है ही नहीं।। बीता हुआ हाथ में नहीं है और आने वाला भरोसे में नहीं है।। जो है वह यही क्षण है यही पल है।।

इसलिए आज ही जिएँ काम करते जाएँ और आनंद लेते जाएँ।। यह न सोचें कि कब जीएँगे अपितु यह देखें कि अभी कैसे जी रहे हैं क्योंकि जीवन तैयारी नहीं माँगता, उपस्थिति माँगता है और जो उपस्थित होकर जी लेता है उसे कभी यह अफ़सोस नहीं होता कि वह जी नहीं पाया।।

जितना जान पाया बोल दिया शेष सांसारिक मनुष्य अल्पज्ञ ही होता है अतः मैं भी अल्पज्ञ ही हूं।।
सर्वज्ञ केवल श्रीभगवान ही हैं।।
सब उन्हीं की इच्छा से है ये लेख भी उन्हीं की इच्छा है और आपका अध्ययन भी उन्हीं की इच्छा है।।
सबके अंदर विराजमान भगवान शिव को सादर प्रणाम करता हूं।।

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