Thursday, 8 January 2026

समस्या हमारे हाथ में नहीं, पर समाधान अवश्य हमारे हाथ में है

समस्या हमारे हाथ में नहीं, पर समाधान अवश्य हमारे हाथ में है

मनुष्य के जीवन में समस्या आना कोई असामान्य बात नहीं है। समस्या का होना अक्सर हमारे नियंत्रण में नहीं होता, लेकिन उस समस्या का समाधान ढूँढना और उससे बाहर निकलना निश्चित रूप से हमारे हाथ में होता है। जीवन की यही सबसे बड़ी सच्चाई है, जिसे हम समझते तो हैं, पर स्वीकार करने में अक्सर चूक जाते हैं।

कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति को स्वयं यह भी पता नहीं चलता कि वह कब और कैसे किसी समस्या में फँस गया। हर समस्या व्यक्ति की अपनी गलती से उत्पन्न नहीं होती। बहुत बार परिस्थितियाँ, समाज, परिवार, कार्यस्थल या दूसरे लोगों के व्यवहार के कारण निर्दोष लोग समस्याओं के जाल में उलझ जाते हैं।

नकारात्मक प्रभाव और अनजाने निर्णय

अक्सर लोगों के जीवन में नकारात्मक सोच रखने वाले लोगों का प्रभाव बहुत गहरा होता है। ऐसे लोग स्वयं तो भ्रमित होते ही हैं, साथ ही दूसरों के जीवन में भी अस्थिरता भर देते हैं। व्यक्ति समस्या नहीं चाहता, पर अनजाने में ऐसे निर्णय ले लेता है जो समस्या को उसके घर, उसके मन और उसके जीवन में प्रवेश करा देते हैं।

नौकरी में असंतोष, परिवार में कलह, व्यापार में घाटा, शरीर से जुड़ी परेशानियाँ और नकारात्मक सोच ये सभी समस्याएँ धीरे-धीरे जन्म लेती हैं। शुरुआत में वे बहुत छोटी लगती हैं, लेकिन समय के साथ वे विशाल रूप ले लेती हैं।

दूसरों की सलाह और अनुभव का भ्रम

कई बार लोग दूसरों की बातों में आकर समस्याओं में फँस जाते हैं, चाहे सामने वाला व्यक्ति कितना ही विद्वान या अनुभवी क्यों न हो। इसका कारण यह है कि हर मनुष्य का अनुभव, सोचने का तरीका और परिस्थितियाँ अलग होती हैं।

जब कोई व्यक्ति अपनी पारिवारिक, आर्थिक या मानसिक समस्या लेकर किसी ज्ञानी या सलाहकार के पास जाता है, तो वह सलाहकार अपने अनुभव के आधार पर समाधान सुझाता है। वह समाधान कई बार सही भी हो सकता है, लेकिन यह आवश्यक नहीं कि वह समाधान उस व्यक्ति की परिस्थिति के अनुकूल हो।

मान लीजिए किसी को पारिवारिक या आर्थिक समस्या है। वह किसी विद्वान के पास जाता है, अपनी समस्या बताता है और विद्वान उसे एक निश्चित रास्ते पर चलने की सलाह देता है। व्यक्ति पूरी ईमानदारी से उस रास्ते पर चलता भी है, लेकिन फिर भी समस्या का समाधान नहीं होता। इसका कारण यह है कि समाधान व्यक्ति विशेष के मन, परिस्थिति और सोच के अनुसार नहीं था।

बचपन की स्मृतियाँ और अवचेतन मन

कई समस्याओं की जड़ बचपन में छिपी होती है। हमारे देश में आज भी मानसिक स्वास्थ्य को बहुत सतही दृष्टि से देखा जाता है। हाल के वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा बढ़ी है, लेकिन यह जागरूकता अधिकतर शहरों तक ही सीमित है। गाँवों में आज भी बच्चों की परवरिश डंडे और डर के सहारे की जाती है पढ़ाई के लिए डंडा, खाने के लिए डंडा, खेलने पर डंडा।

बचपन में घटित कई दुःखद घटनाएँ बच्चे के अवचेतन मन में गहरे बैठ जाती हैं। बच्चा बड़ा होकर उन घटनाओं को भूल जाता है, लेकिन वे स्मृतियाँ मन के किसी कोने में जीवित रहती हैं। आगे चलकर वही दबा हुआ डर, असुरक्षा या पीड़ा समस्या के रूप में सामने आती है। व्यक्ति को समझ ही नहीं आता कि समस्या की जड़ कहाँ है, क्योंकि उसे स्वयं उस घटना की कोई स्पष्ट स्मृति नहीं होती।

समस्या का समाधान कोई जादू नहीं

आज के समय में लोग त्वरित समाधान चाहते हैं एक सलाह, एक उपाय, एक मंत्र और समस्या समाप्त। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। समस्या का समाधान कोई जादू नहीं है कि आपने कहा और किसी ने एक टिप्स दे दी और सब ठीक हो गया।

जब लोग मुझसे फोन या संदेश के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान पूछते हैं, तो मैं उनसे यही कहता हूँ जब तक मैं आपकी समस्या को पूरी तरह समझ नहीं लेता, तब तक कोई समाधान नहीं बता सकता। समस्या को समझने के लिए संपूर्ण ध्यान, समय और ईमानदारी की आवश्यकता होती है।

आप किसी भी विद्वान, गुरु या सलाहकार के पास जाएँ, वह आपको दिशा दिखा सकता है, रास्ता बता सकता है, लेकिन उस रास्ते पर चलना आपको ही पड़ेगा। समाधान बाहर से नहीं आता, वह भीतर से निकलता है।

स्वयं का समाधान स्वयं

प्रकृति का यही नियम है हर व्यक्ति को अपनी समस्या का समाधान स्वयं करना होता है। कोई और आपकी जगह उस संघर्ष को नहीं जी सकता, न ही आपकी जगह निर्णय ले सकता है। जब व्यक्ति अपनी समस्या को गहराई से समझता है, अपने मन को सुनता है और अपने अनुभव से सीखता है, तभी वास्तविक समाधान जन्म लेता है।

समस्या से भागना नहीं, उसे समझना ही समाधान की पहली सीढ़ी है। और जब व्यक्ति यह स्वीकार कर लेता है कि समाधान उसके अपने हाथ में है, तभी वह सशक्त बनता है।

क्योंकि समस्या आना जीवन का हिस्सा है,
पर समाधान ढूँढना जीवन को दिशा देना है।

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