पूरा ब्रह्मांड एक ही मूल चेतना से बना है
पूरा ब्रह्मांड एक ही मूल चेतना से बना है — वही चेतना जो हर जीव, हर पेड़, हर तारे और हर परमाणु में अलग-अलग रूप में प्रकट होती है। यह चेतना कोई वस्तु नहीं, बल्कि वह ऊर्जा का अनुभव है जो सबको जोड़ती है। जिस तरह एक ही सागर से असंख्य लहरें उठती हैं और फिर उसी में विलीन हो जाती हैं, उसी तरह हर जीव, चाहे वह इंसान हो या एक कण, उसी एक ब्रह्मांडीय चेतना की लहर है।
विज्ञान और अध्यात्म दोनों इस सत्य की झलक देते हैं। क्वांटम स्तर पर देखा जाए तो हर कण एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है, मानो वे किसी अदृश्य जाल का हिस्सा हों। वहीं ध्यान और आत्मचेतना के अनुभव में भी व्यक्ति यह महसूस करता है कि “मैं” और “दूसरे” के बीच की सीमाएँ केवल भ्रम हैं — वास्तविकता में सब कुछ एक ही कंपन, एक ही ऊर्जा की अभिव्यक्ति है।
यह समझ हमारे भीतर गहरी करुणा और संतुलन जगाती है। जब हम जान लेते हैं कि हर जीव में वही चेतना प्रवाहित है जो हमारे भीतर है, तो द्वेष मिटने लगता है और एकता का अनुभव जन्म लेता है। यही वह बिंदु है जहाँ विज्ञान, अध्यात्म और प्रेम — तीनों एक हो जाते हैं।

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